
“वह खालीपन छोड़ गए हैं, जिसे भरना आसान नहीं होगा”
विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है, और उनके जाने के बाद भारतीय क्रिकेट में केवल एक खिलाड़ी की कमी नहीं, बल्कि एक जबरदस्त ऊर्जा और जुनून की भी कमी महसूस की जाएगी। चाहे वह बल्लेबाजी कर रहे हों, मैदान में निर्देश दे रहे हों या सिर्फ हँसते-बोलते हों — उनकी उपस्थिति में हमेशा एक गहराई और जोश होता था।
जब टेस्ट क्रिकेट लोकप्रियता के लिए संघर्ष कर रहा था और खिलाड़ी सीमित ओवरों को प्राथमिकता दे रहे थे, तब विराट कोहली ने तीनों प्रारूपों में सफलता हासिल कर यह साबित किया कि समर्पण और अनुशासन से सब संभव है। वे टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े समर्थक रहे — मैदान पर भी और बाहर भी। उन्होंने दर्शकों को स्टेडियम तक खींचा और ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों को भी राहत दी।
विराट ने भारत को वर्षों तक सचिन तेंदुलकर की कमी महसूस नहीं होने दी। अब भारत किसी ऐसे खिलाड़ी की प्रतीक्षा कर रहा है, जो कोहली जैसा जुनून और निरंतरता ला सके — जो शायद आसान नहीं होगा।